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Hinglajmata temple shaktipeeth

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हिंगलाज शक्तिपीठ   पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रान्त में स्थित है माता हिंगलाज शक्तिपीठ, जहां माता का ब्रह्मरन्ध्र गिरा था। हिंगलाज शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है। हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार जहाँ-जहाँ सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। ये अत्यंत पावन तीर्थस्थान कहलाये। ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैले हुए हैं। 'देवीपुराण' में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है। यह शक्तिपीठ 25.3° अक्षांश, 65.31° देशांतर के पूर्वमध्य, सिंधु नदी के मुहाने पर (हिंगोल नदी के तट पर) पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के 'हिंगलाज' नामक स्थान पर, कराची से 144 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। कराची से फ़ारस की खाड़ी की ओर जाते हुए मकरान तक जलमार्ग तथा आगे पैदल जाने पर 7वें मुकाम पर चंद्रकूप तीर्थ है। अधिकांश यात्रा मरुस्थल से होकर तय करनी पड़ती है, जो अत्यंत दुष्कर है। आगे 13वें मुकाम पर हिंगलाज है। यहीं एक गुफ़ा के अंदर जाने पर देवी का स्थान है। पौराणिक उल्लेख पुराणों में हिंगलाज पीठ की अतिशय महिमा है। 'श्...

Shakti peeth

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3 शक्तिपीठ   शक्तिपीठ का अर्थ है जहाँ देवी सती के अंग कट कर गिरे थे और ये शक्तिपीठ आज भी जागृत है। शिवजी का राम जी के दर्शन करना एक बार त्रेतायुग मे शिवजी अगस्त्य ऋषि के पास गए। उनके साथ जगज्जननी सतीजी भी थी। ऋषि अगस्त्य ने शिव जी को जगत ईश्वर जान कर उनका आदर किया तथा उनहे भगवान राम कि कहानिया सुनाई । कुछ दिन कहानी सुने के बाद आश्रम से प्रस्थान किया। राम कथा सुनने के बाद शिव जी के मन मे श्री राम जी को दर्शन करने की इच्छा जागृत हुई । उस समय लंका पति रावण सीता जी का हरण करके ले जा रहा था। राम और लक्ष्मण जी उस समय सीता जी कि खोज कर रहे थे। शिवजी सोच रहे थे कि प्रभु के दर्शन कैसे करे तभी उन्होंने राम जी को देखा और शिवजी के नेत्र भर आऐ।आपने इष्टदेव के दर्शन कर के शिवजी बहुत प्रसन्न थे और वापस  सती के पास आ गए । शिव जी को इतना प्रसन्न देख कर सती के मन मे संदेह उठ खड़ा हुआ। शिवजी के समझाने पर भी सती जी के मन का संदेह नही गया तब शिव जी ने उन्हे संदेह दुर करने को कहा  तब सती ,सीता जी का रूप धारण कर के राम जी के सामने गई। राम जी ने सतीजी जो पहचान लिया और प्रणाम किया औ...